चुनाव पर दोहे | Election Dohe in Hindi

Chunav ( Election ) Dohe Doha Image in Hindi – इस आर्टिकल में चुनाव ( इलेक्शन ) पर दोहे दिए हुए है. इन्हें जरूर पढ़े.
चुनाव का दौर जैसे ही शुरू होता है. नेताओं का एक हुजूम बड़ा ही सक्रिय हो जाता है. जरूरत पड़ने पर जो नेता मिलते नहीं है वो चुनाव में गांव-गाँव के रास्ते नापते नजर आते है. नेताओं को चुनना अपने आप में एक बहुत बड़ा निर्णय होता है. अगर आप गलत नेता चुन लिए तो उसे पूरे पांच साल तक झेलना पड़ेगा। इसलिए बहुत सोच समझकर ही नेता का चुनाव करें।
चुनाव पर दोहे

योगी-अखिलेश दोउ खड़े, किसको डाले वोट
गलती अबकी बार कर गये, बहुत पड़ेगी चोट.
बाते लम्बी-लम्बी, सुने ना किसी की पीर,
सबको बाँट रहे है आश्वासन की मीठी खीर.
नेताओं को पता है, सत्ता मिलती नहीं बारम्बार
इसलिए सुख भोग लूँ, बढ़िया बांग्ला और कार.
Chunav Par Dohe

भ्रष्टाचारी नेताओं की पहचान करो चुनाव में,
जीत गये अगर तो पांच साल नहीं आएंगे गाँव में.
गरीब और पिछड़ों के हित की भूल गये है नीति,
जातिवाद और धर्म के नाम पर चल रही है राजनीति।
Election Dohe in Hindi

जनमानस खामोश है देख नेताओं के रंग,
समझ नहीं पा रही है कौन है किसके संग.
बेरोजगारी बढ़ती गई, बढ़ते गये खूब गरीब
भ्रष्टाचार करके नेताओं का चमका खूब नसीब।
नैतिकता के पतन की तीव्र हो गयी है चाल,
नेताओं को कुर्सी वही चाहिए जिसमें मिलता हो माल.
चुनाव पर दोहा

स्वयं का हित देखे पर देश का भी रहे ध्यान,
सोच समझ कर ही करे, आप अपना मतदान।
ठण्ड बढ़ रही है, जल रहे है अलाव,
खूब हो रही है बातें कैसा होगा ये चुनाव।
Chunavi Dohe

जब तक रहो विपक्ष में खूब करो हड़ताल,
कौआ चित्त से बने रहो, चलो हंस की चाल.
मंत्री पद वो चीज है, जो इक बार मिल जाए
सम्पूर्ण परिवार समेत सात पुश्त तर जाए.
चमचागिरी का चश्मा पहन कर करते तारीफ़,
जिन्हें पता ही नहीं है आज कौन सा है तारीख़।
नेता पर दोहे
नेता जी बोले मीठा-मीठा, कर्म में है सब खोट।
जनता हरदम ठगी महसूस करे, पाकर मीठी चोट॥
चुनाव में नेता जी हाथ जोड़े, उसके बाद बने हुजूर।
अब जनता हाथ जोड़े, रहती खड़ी उनके आगे मजबूर॥
बड़े-बड़े मंच पर, जो देते खूब बयान।
काम करें तो देश का, हो जाए कल्याण॥
सच्चा नेता वो नहीं, जो करे दिखावटी काम,
जनता का जो हित करे, उसका ऊँचा नाम।
समाज पर दोहे
मिल-जुल कर सब साथ रहे, ले प्रभु का नाम।
बिना एकता के जल रही, दुनिया सारी सुबह-शाम॥
जो जन सेवा कर रहें, वही सच्चे वीर।
बाकी सब तो नाम के, जग में बने अमीर॥
जाति-पाति के जाल में, उलझा सारा समाज।
नफरत को छोडो, नेह-प्रेम को हृदय में भरो आज॥
चुनावी दोहा
नेता जी राजा बन गए, जनता बन गई दास।
पांच बरस के बाद फिर, भ्रष्टाचारी पर करते विश्वास॥
नोट बाँट कर वोट मांगते, जो है सभी के हाथ।
जीत गए तो फिर नहीं, जनता से करते बात॥
वादों की गठरी लिए, नेता जी घूमे गांव-गांव।
चुनाव बीत जाने के बाद, जनता समझी हर दाव॥
नोट और नशे से अब, वोट खरीदे जाएं।
जनता फिर भी सो रही, किसे जगाने जाएं॥
राजनीति पर कटाक्ष भरे दोहे
नेता जैसे मेघ हैं, चुनावी ऋतु ख़ास,
बरसें केवल वोट तक, फिर कर दें उदास।
संसद में वो करते है, राजनीति का व्यापार,
जनता उम्मीद लगाई उनसे, जिनको पैसे से प्यार।
भ्रष्टाचारी बन जाते है, सत्ता के ये सरदार,
ईमानदार तब तक रहती है, जब तक होती है हार।
भारत में सभी चुनावो को एक साथ करवाना चाहिये। इससे सबका समय बचेगा और पैसा भी बचेगा। उस बचे समय और पैसों को देश के विकास कार्यों में खर्च किया जा सकता है. एक चुनाव होने से राजनीतिक बदलाव भी आएगा।
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